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अमल का सजा और जज़ा अल्लाह के पास है

अमल का सजा और जज़ा अल्लाह के पास है

अमल का सजा और जज़ा अल्लाह के पास है
मेरे मोहतरम और अजीज दोस्तों, आज हम
बजाहिर कुछ देख कर या दूसरों से सुनकर,
अहम फैसले कर बैठते हैं।खुदाया कीसी को ग़लत समझने स पहलेे देख लिया करें।
क्या वह ऐसा है भी या नहीं। तो आज हम इस लेख में पढ़ेंगे इस के बारे में

एक समय की बात किसी मुल्क में एक रहम दिल बादशाह हुकूमत करता था। उस बादशाह की आदत थी कि भेष बदलकर अवाम की खबर गिरी करता था।

एक दिन वह बादशाह अपने वज़ीर के साथ खबर गिरी करता हुआ शहर के किनारे पहुंचा उसने एक आदमी को गिरा हुआ देखा,उसने उसे हीला कर देखा तो वह मर चुका था।

लोग उसके पास से गुजर कर जा रहे थे, बादशाह ने लोगों को आवाज़ दी लेकीन लोग बादशाह को पहचान न सके औरे पूछा क्या बात है। बादशाह ने कहा इसे किसी ने क्यों नहीं उठाया।

लोगों ने कहा यह बहुत बुरा और गुनहगार इंसान है, हर वक्त शराबखाने में होता है और तवायफों के चक्कर काटता है। बादशाह ने कहा क्या यह मुसलमान नहीं है, क्या यह उम्मते मोहम्मद सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम नहीं है। मैं मानता हूं यह गुनहगार भी होगा और ज़ानी भी होगा।

अमल का सजा और जज़ा अल्लाह के पास है

लेकिन बहसीयते इंसान हम इसके कफन और दफन करते, इस का मामला अल्लाह ने तय करना है। अल्लाह चाहे तो इसे माफ कर दे या इसे सजा दे।

लेकिन इंसानियत के नाते हमारा यह फर्ज बनता है कि हम इस के कफन और दफन करें, बादशाह ने यह कहा और उसकी लाश उठाकर उसके घर पहुंचा दी।

उसकी बीवी ने उसका लाश देखी तो रोने लगी ,बादशाह और वजीर वही उस औरत का रोना सुनते रहे।

औरत कह रहे थे मैं गवाही देती हूं कि मेरा पति अल्लाह का वली है ,और नेक लोगों में से हैं।
बादशाह को बड़ा ताज्जुब हुआ और कहने लगा,
यह कैसे हो सकता है लोग तो इसकी बुराई कर रहे थे। और तो और इसकी मय्यत को भी हाथ लगाने तैयार नहीं हो रहे थे। उसकी बीवी ने कहा मुझे भी लोगों से यही तवक्को थी।

लेकिन हकीकत यह है कि मेरा शौहर हर रोज शराब खाने जा कर शराब खरीदा और उसे घर लाकर गटर में बहा देता। और कहता है चलो कुछ तो गुनाहों का बोझ मुसलमानों से कम हुआ,

इसी तरह रात के वक्त एक बुरी औरत के घर जाता,और उससे उज़रत का पैसा दे देता और कहता तु अपना दरवाजा बंद कर ले कोई तुम्हारे पास ना आने पाए।
और घर आकर कहता अल्हम्दुलिल्लाह आज मैंने उस औरत का और नौजवानों का गुनाहों का बोझ कुछ हल्का कर दिया है।

और लोग इसे उन जगहों पर आते-जाते देखते थे। तो मै अपने खाविंद से कहता था कि लोग तुम्हें मरने के बाद जनाजा का नमाज भी नहीं पढ़ेगे, और तुम्हें दफन भी नहीं करेंगे।

तो मुझसे कहता तुम घबराओ नहीं मेरे जनाजे की नमाज वक्त का बादशाह और औलिया इकराम पढ़ाएंगे।

यह सुनकर बादशाह हम रो कर कहने लगा मैं बादशाह हूं ,कल हम इसे गुसल भी देंगे और नमाज ए जनाजा भी पढ़ाएंगे।और उसके तदफीन भी हम खुद करवाएंगे। चुनांचे उसका जनाज़ह बादशाह औलिया और ओलमा ए कीराम और कसीर मुसलमानों ने पढ़ाया।

मेरे मोहतरम और अजीज दोस्तों, आज हम
बजाहिर कुछ देख कर या दूसरों से सुनकर,
अहम फैसले कर बैठते हैं।खुदाया कीसी को ग़लत समझने स पहलेे देख लिया करें।
क्या वह ऐसा है भी या नहीं।

मेरे प्यारे भाइयों अगर कोई इंसान गुनाहगार है या नेक है तो इसका मामला अल्लाह ने तय करना है।
उसके अमल का अज़र और सज़ा अल्लाह के पास है।

अल्लाह जैसा चाहे वैसा उसके साथ बर्ताव करें। अल्लाह चाहे तो उसे माफ करें ,या अल्लाह चाहे तो उसे सजा दे।

उम्मीद करता हूं कि आप लोगों को यह लेख पसंद आई होगी।

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