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इस ज़मीन पर तमाम इंसानों का हक़ बराबर है,कोई ज़मीन किसी की नहीं

इस ज़मीन पर तमाम इंसानों का हक़ बराबर है,कोई ज़मीन किसी की नहीं

एक शख्स ह़ज़रत इमाम अली रज़ि अल्लाह ताअला अन्हु के खीदमत आया,और अर्ज़ करने लगा,या अली मेरा एक खज़ुर का बाग़ है.

उसमें दो सौ दरख़त है उसमें मैं खुद मेहनत करता हूं.और दीन रात एक कर के कमाता हूं. लेकिन जब उसका फायदा होता है तो उसका 40 चालीसवां हिस्सा गरीबों को देना परता है.
क्यूं मैं ज़कात नीकालूं
जब ज़मीन मेरी दरख्त मेरे मेहनत मेरे तो इस मे किसी और का हीस्सा कैसे.

बस यह कहना था तो इमाम अली रज़ि अल्लाहु ताअला अन्हु ने फरमाया ऐ शख्स यह ज़मीन अल्लाह की है इस जमीन का खालीक़ अल्लाह है. बताओ क्या तुम्हारे पास अल्लाह की सनद है, कि यह ज़मीन तुम्हारी है.उसने कहा मेरे दादा परदादा सम्भालते थे.

इमाम अली ने फरमाया अल्लाह ने जब आदम को भेजा बगैर किसी सनद के भेजा.
इस जमीन पर तमाम इंसानों का हक़ बराबर है कोई ज़मीन किसी की नहीं फिर अल्लाह की इस जमीन को अपनी जागीर समझते हो.

बताओं जिस सूरज की रोशनी से ज़मीन से निकले हुए दरख्त उगते हैं पकते हैं उस सूरज की रोशनी भी तुम्हारी है, वह नज़रे झुकाने लगा बताओं जो पानी तुम दरख्त को देते हो क्या वह पानी भी तुम्हारी है,वह शरमशार होने लगा.

इमाम ने फरमाया ऐ शख्स याद रखना तुम सिर्फ अल्लाह की ज़मीन और पानी और गर्मी के वसीले से मेहनत करके एक नौकर की हैसियत से अपना रिज़्क़ तलब करते हो.यह अल्लाह की जागीर है.

जैसे एक इन्सान किसी दूसरे इन्सान की चीज पर मेहनत करें.
और जो उसका फायदा होगा जिसकी वह चीज थी.
क्या उस फायदे में उसका हिस्सा नहीं होगा.
तो वह दस्ते अदब जोड़कर कहने लगा हां या अली ज़रूर होगा.

तो इमाम अली ने फरमाया ऐ शख्स तभी अल्लाह ने ज़कात रखी है,ताकि जो तुम अल्लाह की ज़मीन में या अल्लाह की नेमतों से कमाओं उसमें से अल्लाह के हकीर बंदों के लिए,
यह सोचकर जिस वसीले से तुम कमाते हो यह सारी वसले अल्लाह की है.

और इस माल पर अल्लाह के हकीर बंदों का हक़ है जब तुम अपने माल का चालीसवां हिस्सा दोगे तुम्हारा जमीर मुत्मइन होगा याद रखना इस जमीन पर अनाज फल हर नेमतें सब इन्सानों का हक़ बराबर बराबर है.

बस कुछ इन्सान मेहनत नहीं करते तो कुछ इन्सान दुसरे का हक़ मार लेतें हैं.

अल्लाह ताअला से दुआ करते हैं कि हमें ह़लाल रिज़्क़ कमाने और हराम से बचने की तौफीक अता फरमाए,और दुसरों का ह़क़ अदा करने की तौफीक अता फरमाए.

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