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कौवा की कहानी ! और चिड़िया और चींटी की कहानी

कौवा की कहानी ! और चिड़िया और चींटी की कहानी!

चिड़िया और चींटी। दोनों इकट्ठे एक पेड़ पर रहते थे.एक दिन बड़ी जोर की बारिश हुई। और चींटी बहाव में बह गए चिंटी बोला बचाओ-बचाओ यह देखकर चिड़िया ने कुछ पत्ते पानी में फेंके दिए। चींटी ने पत्ते का सहारा लिया और बच निकला। एक दिन शिकारी ने चिड़िया को निशाना लगाया । चींटी ने झट से शिकारी के पांव में काट लिया जिससे शिकारी का निशाना चूक गया । और चिड़िया फुर्र से उड़ गया।

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बहुत पहले की बात है। एक धनवान राज्य में 2 कैआ रहते थे । और वे दोनों पति-पत्नी थे। वे दोनों महल के सबसे बड़े और शानदार पेड़ पर रखते थे।पेड़ के पास ही एक अजगर का घर था। यह जान के भी दोनों वहां खुशी-खुशी रहते थे। रात को सोते थे। और दिन में भोजन की तलाश में बाहर निकल जाते थे। 1 दिन मादा कौवा ने अंडे दिए और कौवा बड़ा खुश हुआ। वह खुशी खुशी रात गुजारे और सुबह दोनों भोजन की तलाश में बाहर निकल गए। जब शाम को लौट कर आया तो देखा कि अंडा है ही नहीं। इससे कौवा बड़ा दुखी हुआ। और थोड़े दिन के बाद मादा कौवा फिर अंडे दिए‌। और भोजन की तलाश में निकल गया। जब शाम को लौट कर आया तो देखा के अंडे फिर गायब है। इससे कौवा बहुत दुखी हुए। मादा कौवा ने कहा जरुर हमारे अंडे अजगर खा जाता है। कौवा ने कहा तुम घबराओ मत मैं कुछ करता हूं। मैं वादा करता हूं इसके बाद वह हमारे बच्चे नहीं खाएगा। दूसरे दिन कौवे ने तालाब के किनारे पहुंचा। वह रोज रानी अपने

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दासी के साथ अति थी। रानी ने अपनी जेवर निकालकर दासी को थमा दी । दासी ने जेवर को एक
ओर रख दिया। इतने में कौवा पेड़ से उतरा और ज़ेवर को मुंह में दबाकर फुर से उड़ गया दासी ने कहा वह देखो लेकर जा रहा है सिपाही ने कौवे को पीछा किया। और पीछा करता रहा ‌। कौवा हार को अजगर के घर में डाल दिया। और जाकर अपने पेड़ पर बैठ गया। और सिपाही ने देख लिया। जैसे ही सिपाही ने हार को निकालने के लिए हात डाला तो हार की जगह अजगर हाथ में आ गया। अजगर को देखते ही सिपाहियों ने अपने भालों से उसे मार डाला। सिपाही ने अंदर से हार निकाल लिया। और कौवा को बिना कुछ कहे ही वापस लौट आए। दोनों कौवा उसके बाद खुशी खुशी रहने लगे।

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