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क्या टीपू सुलतान एक योद्धा थे जाने पूरी बातें

क्या टीपू सुलतान एक योद्धा थे जाने पूरी बातें

क्या टीपू सुलतान एक योद्धा थे जाने पूरी बातें हेलो दोस्तों आपने टीपू सुल्तान के बारे में तो सुना ही होगा। आखिर कौन थे टीपू सुल्तान, वह हमेशा से बहादुरी और वीरता के लिए प्रसिद्ध थे। जीन्हे फस्ट मिसाइल मैन भी कहा जाता है। तो आइए जानते हैं टीपू सुल्तान की जिंदगी से जुड़ी कुछ ऐसी बातें जिसे शायद ही आप जानते हैं।

टीपू सुल्तान का जन्म 1750 में हुआ था। जिन्हें कर्नाटक और मैसूर का शेर भी कहा जाता था।
इसके पीछे भी एक कहानी है ।

जब टीपू छोटे थे तो अपन कुछे दोस्तों के साथ जंगल गए हुए थे। तो अचानक से एक शेर ने हमला कर दिए था‌। तब उनके सारे दोस्त भाग गए। लेकिन टीपू उस शेर से नहीं डरे, और उस का डटकर सामना किया। और उसे आरे हाथो ले लिया।

तभी से उसे टाइगर की उपाधि दी गई है। टीपू सुल्तान के पिता हैदर अली ने उसे बचपन सें ही तलवारबाजी ,घोड़सवारी और शूटिंग सिखा दी थी।
लेकिन 1782 में उनके पिता की मृत्यु हो गई, जिनके बाद उनके पिता का सिंघासन उन्हों संभाला। और उन्होंने अपने प्रशासन में कई बदलाव किए। और साथ ही उन्होंने लोहे से बने मैसूर का विस्तार किया। जिन्हें फर्स्ट मिसाइल मैन भी कहा जाता है।

टीपू अपने आसपास की चीजों का इस्लामीकरण चाहते थे। उन्होंने बहुत सी जगह के नामों को बदल कर मुस्लिम के नामों पर रख दिया।

साथ ही टीपू ने गद्दी पर बैठकर मैसूर को मुस्लिम राज्य घोषित कर दिया। उन्होंने एक करोड़ हिंदुओं को धर्म परिवर्तन कराकर मुस्लिम बना दिया। कहा जाता है कि जिन्होंने धर्म परिवर्तन से मना किया था उसे मौत के घाट उतार दिया था।

लेकिन कुछ इतिहासकारों का मानना है कि यह बिल्कुल गलत है। क्योंकि टीपू खुद कई मंदिरों में कई किलो सोना चढ़ाया करते थे। और खुद भी कई मंदिरों में जाया करते थे। तो फिर कोई ऐसा योद्धा भला ऐसा कैसे कर सकता है। आपको शायद ही यकीन हो लेकिन टीपू राम नाम की अंगूठी पहना करते थे।

उनकी मृत्यु के बाद यह अंगूठि अंग्रेजों ने उतार ली थी और इसे अपने साथ ले गए थे। टीपू सुल्तान की तलवार की बात की जाए तो उसकी वजन 7 किलो 400 ग्राम की है। आज के समय में टीपू सुल्तान की तलवार की कीमत 21 करोड़ है। वंकोर के राजा अपनी मदद के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी से अपील की।
और इसके जवाब में लॉर्ड कॉर्नवॉलिस ने टीपू सुल्तान के विरोध करते हुए एक मजबूत सैनेबल का निर्माण करने के लिए।
मराठों और हैदराबाद के नीजाम के साथ गठबंधन का गठन किया।

सन 1970 में ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना ने टीपू सुल्तान पर हमला कर दिया। और जल्द ही कोयंबटूर जिले पर हमला कर दिया। और अधिक से अधिक नियंत्रण स्थापित कर लिया।

फीर टीपु ने कॉर्नवॉलिस पर हमला किया पर हमला किया। लेकिन वह अपने अभियान में ज्यादा सफल ना हो सके, संघर्ष 2 वर्षों तक जारी रहा।
और सन 1792 में युद्ध को समाप्त करने के लीए

उन्होंने श्री रंग पटनम की संधी पर हस्ताक्षर कर दिए। इसके परिणाम स्वरुप उन्हें मालाबार बेंगलुरु को मिलाकर कई प्रदेशों को खोना पड़ा।
हालाके टीपू सुल्तान अपने कई प्रदेशों को खोने के बाद भी अंग्रेजों द्वारा दुश्मनी बनाए रखा।

सन 1799 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने मराठों और निजामों के साथ गठजोड़ कर मैसूर पर हमला किया। चौथा एंग्लो मैसूर युद्ध था। जिस में ब्रिटिशस ने मैसूर की राजधानी श्रीरंगपट्टनम पर कब्जा कर लिया था। इस लड़ाई में ईस्ट इंडिया कंपनी ने टीपू सुल्तान की हत्या कर दी थी।

और इस तरह टीपू सुल्तान का शासन काल समाप्त हो गया। और कि वह अपने पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए।
तो दोस्तों टीपू सुल्तान की कहानी जानकर आपको कैसा लगा। नीचे कमेंट करके जरूर बताएं।

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