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मेरी उंगली कट गई और तुम कहते हो इसमें कोई भलाई होगी

मेरी उंगली कट गई और तुम कहते हो इसमें कोई भलाई होगी एक बादशाह का एक नेक वज़ीर था।जो हर काम में कहता था के इस मे भलाई थी। चाहे नुकसान हो या फायदा वो सबको दरस देता था कि इसमें भलाई है।

एक दिन जंग के मैदान में बादशाह की उंगली कट गई। बादशाह तड़प रहा था। तबीब इलाज कर रहे थे।बादशाह के हाथ के पट्टी करने के बाद। बादशाहो उदास बैठा था कि मेरी उंगली कट गई। वो वजीर आकर दस्ते अदब जोड़कर कहने लगा।

बादशाह सलामत आप परेशान ना हो इसमें भी कोई भलाई होगी। यह कहना था कि बादशाह को गुस्सा आ गई और कहने लगा मेरी उंगली कट गई और तुम कहते हो इसमें कोई भलाई होगी। जाओ सिपाही इसे ले जाओ और कैदखाने में कैद कर दो। सिपाही वजीर को कैद कर देते हैं। बादशाह की एक आदत थी कि वह मुख्तलिफ जगहों पर घूमने जाया करता था।

वैसे ही वह कुछ दिनों के बाद घूमते-घूमते एक मंदिर आ पहुंचा और वह लम्हात सूरज ग्रहण के थे। वहां जो पंडित थे उनकी यह मीन्नत थी। के जो भी इंसान इस वक्त मंदिर में आएगा उसकी बलि चढ़ाएंगे , बादशाह जैसे जैसे मंदिर आ पहुंचा। पंडितों ने बगैर किसी सवाल और जवाब कि उसे पकड़ लिया। बली की जगह बांध दिया। जैसे ही छुरी को उसके गर्दन पर रखा तो किसी ने देखा कि ये इन्सान तो नाकीस है। इसके तो उंगली कटे हुए हैं। नाकीस और ऐबदार इंसान की बलि नहीं होती। जाओ इसको वापस छोड़ कर आओ।

और उसको आजाद कर दिया। बादशाह जब घर वापस पहुंचा। और फौरन वह कैदखाने में आया और उस वजीर को आजाद कर दिया। और बताया कि तुम सही कहते थे। अगर आज मेरी उंगली कटी हुई ना होती तो आज मैं तुम्हारे सामने ना होता। लेकिन एक बात बताओ मैं मानता हूं मेरी उंगली कटे होने की वजह से मेरी जान बच गई। लेकिन तुम्हारे कैद होने में क्या फायदा था। यह कहना था कि वजीर दस्ते अदब जोड़कर कहने लगा।

कि बादशाह सलामत इसमें यह भलाई था कि अगर मैं कैद ना होता तो आपके साथ होता और अगर आपके साथ होता तो आपकी जगह मुझे कत्ल किया जाता। बादशाह यह सुन कर रोने लगा और रो कर कहने लगा इस जमीन पर जो भी होता है अच्छे के लिए होता है।

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