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बुद्धिमान व्यक्ति की कुछ विशेषता का उल्लेख करे

बुद्धिमान व्यक्ति की कुछ विशेषता का उल्लेख करे

एक बुद्धिमान व्यक्ति की पहचान कैसे की जा सकती है?

Budhiman vyakti ki Kuchh visheshta ka ullekh Karen

बुद्धिमान व्यक्ति की कुछ निशानिया-

वे ज्यादातर समय खुद से बात करते हैं। यह संभवतः सबसे अच्छा बौद्धिक रूप से संपन्न अनुभव है।

वे ऐसे अवसर देखते हैं जहाँ दूसरों को दोष दिखाई देते हैं।

आप जितने अधिक बुद्धिमान होंगे आपमें अपनी क्षमताओं को कम करने की प्रवृत्ति होगी।

वे अकेलेपन का शिकार होते हैं और वास्तव में स्वयं की महान भावना के कारण अकेले रहने का आनंद लेते हैं।

एक बुद्धिमान व्यक्ति जितनी बार अपनी ज़िंदगी में ‘हाँ’ नहीं बोलता उससे ज़्यादा बार वो ‘ना’ बोलता है।

वे हृदयहीन नहीं हैं, उन्होंने सिर्फ अपने हृदय का कम उपयोग करना सीखा है।

वे सिर्फ दूसरो को समझाते ही नही बल्कि उनसे सीखना भी पसंद करते है।

एक बुद्धिमान व्यक्ति के सारे फैसले दूरदर्शी सोच पर होते है न की वर्तमान की उसकी स्थितियों पर।

वे सबसे पहले अपने दिमाग से सोचते है फिर अपने दिल से।

वे लोगों से ज्यादा ‘विचारों’ पर चर्चा करते हैं।

बुद्धिमान लोगों को गपशप करना पसंद नहीं है, वे विचार और नवाचारों के बारे में बात करना पसंद करते हैं। इसलिए, वे हर किसी के साथ दोस्ती नहीं करते।

वे खुद को जरूरत से ज्यादा महत्व देना बंद कर देते हैं।

एक बुद्धिमान व्यक्ति हमेशा दूसरों की परेशानी हल करने के बारे में सोचता है।

बुद्धिमान लोग अपनी जिम्मेदारियों से पीछा बिल्कुल नही छुड़ाते है।

बुद्धिमान लोग दूसरे लोगों को जीवन में बढ़ने में मदद करते हैं, वे आपको उनसे आगे निकलने से डरते नहीं हैं।

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पढ़ने के लिए धन्यवाद।

एक पत्रकार ने भी psychiatrist से यही प्रश्न पूछा था , बुद्धिमान व्यक्ति की क्या पहचान होती है?

psychiatrist ने कहा हम पहले अबनॉर्मल लोग पहचान कर अलग कर लेते है , फिर बचे हुए लोगो में से बुद्धिमान की पहचान करते है।

” फिर आप यह कैसे पहचानते हैं कि, कौन अबनॉर्मल है और कौन नहीं ? “

👷डॉक्टर—” हम एक वाशिंग मशीन पानी से पूरा भर देते हैं और मरीज को,

एक चम्मच

एक गिलास और

एक बाल्टी

देकर कहते हैं कि वो वाशिंग मशीन को खाली करे। “

पत्रकार—” अरे वाह, बहुत बढ़िया। यानी जो नार्मल व्यक्ति होता होगा वो बाल्टी का उपयोग करता होगा क्योंकि वो चम्मच और गिलास से बड़ी होती है। “

डॉक्टर—” जी नहीं। नार्मल व्यक्ति वाशिंग मशीन में लगे हुए ड्रेन स्वीच को घुमा कर मशीन को खाली करता है।

😂😂

कहीं ऐसा तो नहीं कि आप ने भी पढ़ते वक्त बाल्टी ही सोचा था?

😂😂😂😂😂😂😂😂😂

फिर आप बचे हुए लोगो में से यह कैसे तय करेंगे कि कौन बुद्धिमान है -पत्रकार ने फिर डॉक्टर👷 से प्रश्न किया।

डॉक्टर-उसके लिए ज्यादा कुछ नहीं करना होता है ,

अबनॉर्मल लोग अलग करने के बाद बचे हुए लोगो को बाजार से सब्ज़ी लाने को कहा जाता है ,

जो टमाटर के ऊपर कद्दू रखकर सब्ज़ी लाता दिखे , वही बुद्धिमान है , बाकी सब लोग नार्मल है। 😂😂

मगर मजाक से हटकर सोचे तो इतना आसान नहीं है , विद्वता को पहचानना,

बल्कि जीवन में बहुत मुश्किल है विद्वता को जान पाना , पहचान पाना, क्योकि ज्यादातर समय हम किताबी ज्ञान को ही विद्वता का रूप मान लेते है।

दक्षिण के एक विद्वान की कहानी है , बनारस से शिक्षा लेकर लौटते हुए , वे रास्ते में पड़ने वाले सभी राज्यों के विद्वानों से शास्त्रार्थ करते और एक एक के करके सबको हराते हुए आगे बढते चले गए। धीरे धीरे उनकी प्रसिद्धि उनके गृहनगर भी पहुंची , जब वे वहां पहुंचे तो स्वयं राजा उनकी अगवानी में खड़े थे। उस भीड़ में उस विद्वान की आँखे अपने माता-पिता को ढूंढ़ रही थी, मगर वे दोनों कही नज़र नहीं आ रहे थे। राजकीय सम्मान से निवृत्त हो जब वह विद्वान घर पहुंचे तो पिताजी बाहर आँगन में कुछ पढ़ रहे थे , पिता के पैर छूकर अंदर जाने लगे तो पिता ने कहा अज्ञानियों के लिए इस घर में कोई जगह नहीं है!!

मगर पिताजी मेने चारो वेद पढ़े है , शास्त्रों का अध्यन किया है , आज देश में चारो तरफ मेरे नाम का डंका बज रहा है।

पिताजी ने बड़ी शांति से जवाब दिया , सब जानता हूँ, मगर ,वह किसी और का दिया हुआ ज्ञान है, इसमें तुम्हारा अपना क्या योगदान है?

वह विद्वान माता से बिना मिले घर की चौखट से ही वापस हो लिए , कई वर्ष बीत के बाद फिर वे अपने गृहनगर पहुंचे , अबकी बार किसी को खबर नहीं थी कि वह विद्वान वापस आ रहे है मगर इस बार उसके पिताजी गाँव के बाहर उसकी अगवानी में खड़े थे।

विद्वान आश्चर्यचकित —आपको कैसे मालूम ?

पिता -बोले -विद्वता की चर्चा नहीं होती, हाँ, हवाए उसकी गंध दूर दूर तक ले जाती है , उसका पता बता देती है। (आचार्य रजनीश की कहानियो से साभार)

अष्टाव्रक की कहानी भी यही कहती है , विद्वता को जान पाना महाराज जनक जैसे ज्ञानी के लिए भी आसान नहीं था , वे भी गलती कर ही बैठे थे। 

रामकृष्ण परमहंस के जीवन से तो यही शिक्षा मिलती है कि जो अपनी विद्वता को , अपने ज्ञान को पचा ले वही विद्वान , मगर उसे पहचान पाना आसान नहीं है।

Read it: How to identify intelligent people – बुद्धिमान लोगों की पहचान