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बुद्धिमान व्यक्ति की कुछ विशेषता का उल्लेख करे

बुद्धिमान व्यक्ति की कुछ विशेषता का उल्लेख करे

एक बुद्धिमान व्यक्ति की पहचान कैसे की जा सकती है?

Budhiman vyakti ki Kuchh visheshta ka ullekh Karen

बुद्धिमान व्यक्ति की कुछ निशानिया-

वे ज्यादातर समय खुद से बात करते हैं। यह संभवतः सबसे अच्छा बौद्धिक रूप से संपन्न अनुभव है।

वे ऐसे अवसर देखते हैं जहाँ दूसरों को दोष दिखाई देते हैं।

आप जितने अधिक बुद्धिमान होंगे आपमें अपनी क्षमताओं को कम करने की प्रवृत्ति होगी।

वे अकेलेपन का शिकार होते हैं और वास्तव में स्वयं की महान भावना के कारण अकेले रहने का आनंद लेते हैं।

एक बुद्धिमान व्यक्ति जितनी बार अपनी ज़िंदगी में ‘हाँ’ नहीं बोलता उससे ज़्यादा बार वो ‘ना’ बोलता है।

वे हृदयहीन नहीं हैं, उन्होंने सिर्फ अपने हृदय का कम उपयोग करना सीखा है।

वे सिर्फ दूसरो को समझाते ही नही बल्कि उनसे सीखना भी पसंद करते है।

एक बुद्धिमान व्यक्ति के सारे फैसले दूरदर्शी सोच पर होते है न की वर्तमान की उसकी स्थितियों पर।

वे सबसे पहले अपने दिमाग से सोचते है फिर अपने दिल से।

वे लोगों से ज्यादा ‘विचारों’ पर चर्चा करते हैं।

बुद्धिमान लोगों को गपशप करना पसंद नहीं है, वे विचार और नवाचारों के बारे में बात करना पसंद करते हैं। इसलिए, वे हर किसी के साथ दोस्ती नहीं करते।

वे खुद को जरूरत से ज्यादा महत्व देना बंद कर देते हैं।

एक बुद्धिमान व्यक्ति हमेशा दूसरों की परेशानी हल करने के बारे में सोचता है।

बुद्धिमान लोग अपनी जिम्मेदारियों से पीछा बिल्कुल नही छुड़ाते है।

बुद्धिमान लोग दूसरे लोगों को जीवन में बढ़ने में मदद करते हैं, वे आपको उनसे आगे निकलने से डरते नहीं हैं।

अगर आपको जवाब अच्छा लगे तो शेयर जरूर कीजिये और मुझे फॉलो करना मत भूलियेगा।

पढ़ने के लिए धन्यवाद।

एक पत्रकार ने भी psychiatrist से यही प्रश्न पूछा था , बुद्धिमान व्यक्ति की क्या पहचान होती है?

psychiatrist ने कहा हम पहले अबनॉर्मल लोग पहचान कर अलग कर लेते है , फिर बचे हुए लोगो में से बुद्धिमान की पहचान करते है।

” फिर आप यह कैसे पहचानते हैं कि, कौन अबनॉर्मल है और कौन नहीं ? “

👷डॉक्टर—” हम एक वाशिंग मशीन पानी से पूरा भर देते हैं और मरीज को,

एक चम्मच

एक गिलास और

एक बाल्टी

देकर कहते हैं कि वो वाशिंग मशीन को खाली करे। “

पत्रकार—” अरे वाह, बहुत बढ़िया। यानी जो नार्मल व्यक्ति होता होगा वो बाल्टी का उपयोग करता होगा क्योंकि वो चम्मच और गिलास से बड़ी होती है। “

डॉक्टर—” जी नहीं। नार्मल व्यक्ति वाशिंग मशीन में लगे हुए ड्रेन स्वीच को घुमा कर मशीन को खाली करता है।

😂😂

कहीं ऐसा तो नहीं कि आप ने भी पढ़ते वक्त बाल्टी ही सोचा था?

😂😂😂😂😂😂😂😂😂

फिर आप बचे हुए लोगो में से यह कैसे तय करेंगे कि कौन बुद्धिमान है -पत्रकार ने फिर डॉक्टर👷 से प्रश्न किया।

डॉक्टर-उसके लिए ज्यादा कुछ नहीं करना होता है ,

अबनॉर्मल लोग अलग करने के बाद बचे हुए लोगो को बाजार से सब्ज़ी लाने को कहा जाता है ,

जो टमाटर के ऊपर कद्दू रखकर सब्ज़ी लाता दिखे , वही बुद्धिमान है , बाकी सब लोग नार्मल है। 😂😂

मगर मजाक से हटकर सोचे तो इतना आसान नहीं है , विद्वता को पहचानना,

बल्कि जीवन में बहुत मुश्किल है विद्वता को जान पाना , पहचान पाना, क्योकि ज्यादातर समय हम किताबी ज्ञान को ही विद्वता का रूप मान लेते है।

दक्षिण के एक विद्वान की कहानी है , बनारस से शिक्षा लेकर लौटते हुए , वे रास्ते में पड़ने वाले सभी राज्यों के विद्वानों से शास्त्रार्थ करते और एक एक के करके सबको हराते हुए आगे बढते चले गए। धीरे धीरे उनकी प्रसिद्धि उनके गृहनगर भी पहुंची , जब वे वहां पहुंचे तो स्वयं राजा उनकी अगवानी में खड़े थे। उस भीड़ में उस विद्वान की आँखे अपने माता-पिता को ढूंढ़ रही थी, मगर वे दोनों कही नज़र नहीं आ रहे थे। राजकीय सम्मान से निवृत्त हो जब वह विद्वान घर पहुंचे तो पिताजी बाहर आँगन में कुछ पढ़ रहे थे , पिता के पैर छूकर अंदर जाने लगे तो पिता ने कहा अज्ञानियों के लिए इस घर में कोई जगह नहीं है!!

मगर पिताजी मेने चारो वेद पढ़े है , शास्त्रों का अध्यन किया है , आज देश में चारो तरफ मेरे नाम का डंका बज रहा है।

पिताजी ने बड़ी शांति से जवाब दिया , सब जानता हूँ, मगर ,वह किसी और का दिया हुआ ज्ञान है, इसमें तुम्हारा अपना क्या योगदान है?

वह विद्वान माता से बिना मिले घर की चौखट से ही वापस हो लिए , कई वर्ष बीत के बाद फिर वे अपने गृहनगर पहुंचे , अबकी बार किसी को खबर नहीं थी कि वह विद्वान वापस आ रहे है मगर इस बार उसके पिताजी गाँव के बाहर उसकी अगवानी में खड़े थे।

विद्वान आश्चर्यचकित —आपको कैसे मालूम ?

पिता -बोले -विद्वता की चर्चा नहीं होती, हाँ, हवाए उसकी गंध दूर दूर तक ले जाती है , उसका पता बता देती है। (आचार्य रजनीश की कहानियो से साभार)

अष्टाव्रक की कहानी भी यही कहती है , विद्वता को जान पाना महाराज जनक जैसे ज्ञानी के लिए भी आसान नहीं था , वे भी गलती कर ही बैठे थे। 

रामकृष्ण परमहंस के जीवन से तो यही शिक्षा मिलती है कि जो अपनी विद्वता को , अपने ज्ञान को पचा ले वही विद्वान , मगर उसे पहचान पाना आसान नहीं है।

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How to identify intelligent people – बुद्धिमान लोगों की पहचान

How to identify intelligent people – बुद्धिमान लोगों की पहचान कैसे करें

बुद्धिमान व्यक्ति की पहचान कैसे की जा सकती है?

बुद्धिमान व्यक्ति की पहचान —

इंटेलीजेंट व्यक्ति अकेला रहना पसंद करते हैं और इसे एंजॉय भी करते हैं. उन्हें अकेलापन तकलीफ़ नहीं देता. वे सबसे अधिक क्रिएटिव और प्रोडक्टिव तभी होते हैं जब उन्हें उनकी पसंद का काम करने दिया जाए.

इंटेलीजेंट लोग कठोर या रूखे नहीं होते. उनके भी दिल होता है लेकिन वे दिल की बजाए दिमाग से काम लेते हैं. वे हर बात के अलग-अलग पहलुओं पर अलग-अलग एंगल से सोचकर किसी नतीजे तक पहुंचते हैं.

इंटेलीजेंट होने का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि बेवकूफ लोग उन्हें अपने जैसा ही समझते हैं. इंटेलीजेंट व्यक्तियों के साथ रहने का फ़ायदा उठाने के लिए भी थोड़ी अकल की ज़रूरत होती है.

इंटेलीजेंट व्यक्तियों को चलताऊ मनोरंजन पसंद नहीं आता. वे लटके-झटके और शोर-शराबे वाली फिल्मों और म्यूज़िक से दूर रहते हैं. वे मॉल भी जाते हैं तो किताबों की दुकान में घुस जाते हैं.

आमतौर पर इंटेलीजेंट व्यक्तियों की हैंडराइटिंग अच्छी नहीं होती. इसका कारण यह है कि वे बहुत तेजी से सोचते हैं लेकिन उतनी तेजी से लिख नहीं पाते, इसलिए उनकी हैंडराइटिंग बिगड़ जाती है.

इंटेलीजेंट लोगों का सोशल सर्किल बड़ा नहीं होता. उनके दोस्त बहुत पुराने और गिने-चुने ही होते हैं. असल में आप जितने स्मार्ट होते हैं, आप उतने ही अधिक सेलेक्टिव हो जाते हैं और बहुत सोचसमझ कर ही किसी से घुलते-मिलते हैं.

इंटेलीजेंट व्यक्ति किसी तरह की बहस या लड़ाई-झगड़े से दूर रहना पसंद करते हैं. यही कारण है कि अक्सर ही वे बहुत सी बातों को जानबूझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं.

वे अक्सर ही खुद से बातें करते रहते हैं. वे मन-ही-मन बहुत सारी बातों पर खुद से ही डिस्कस कबुद्धिमान व्यक्ति की पहचान करते हैं. यह उनके लिए बहुत संतोषजनक एक्टीविटी होती है.

इंटेलीजेंट लोग हर बात में, हर घटना में, हर चीज़ में पॉज़िटिविटी और अवसर तलाशते हैं जबकि दूसरे लोग औरों की गलतियां और कमियां खोजते रहते हैं.

इंटेलीजेंट व्यक्ति अपनी काबिलियत को आम तौर पर कम करके आंकते हैं. वे बड़बोले नहीं होते. वे डींग नहीं हांकते. वे बिना पूछे किसी को कुछ नहीं बताते.

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मैं जीवन में महान काम कैसे कर सकता हूँ?

सोशल मीडिया से दूर रहें।

जीवन में जोखिम लो।

एकल यात्रा करें और लोगों से सीखें।

लोगों को खुश करना बंद करें। आप डॉग नहीं हैं और वे आपके बॉस नहीं हैं।

एक शौक विकसित करें। जैसे- खाना पकाना, फोटोग्राफी करना, दौड़ना आदि।

शारीरिक रूप से स्वस्थ रहें। हर दिन व्यायाम करो।

7. उदार बने।

  1. बहुत सारा पानी पिएं और संतुलित आहार लें।
  2. जल्दी उठो और जल्दी सो जाओ।
  3. हर रोज कुछ पढ़ें। पढ़ने से आपकी कल्पना शक्ति में सुधार होता है। लिखना भी शुरू करें।
  4. रोजाना 7-8 घंटे की नींद लें, आपके शरीर को आराम की जरूरत होती है।
  5. गलतियाँ करना। कोई भी पूर्णतया कुशल नहीं होता। असफल होना, सीखना और फिर से उठना।
  6. अधिक सुनने और कम बोलने की आदत विकसित करें।
  7. प्रत्येक दिन के लिए आभारी होने के लिए कुछ ढूंढें।
  8. प्यार में पड़ना लेकिन सबसे आगे खुद से प्यार करना।

16 सकारात्मक लोगों के आसपास रहते हैं।

रोज ध्यान करें।

याद रखें, कोई भी 9 से 5 की नौकरी करके अमीर नहीं बन जाता है। अपने दिल का पालन करें, यह आपको अंतिम सफलता तक ले जाएगा।

हार्ड तरीका ही सही तरीका है, लॉटरी की तलाश मत करो।

आज से शुरू करो। यह हमेशा असंभव सा लगता है जब तक कि पूरा न हो जाय।

यह तर्क न दें, इसे जाने दें।

लोगों की आलोचना न करें।

लोगों को माफ कर दो और कुछ दया दिखाओ।

हर कोई शांत होने के लिए वास्तव में कठिन प्रयास कर रहा है। जाहिर है, जो पहले से ही कोशिश नहीं कर रहे हैं उनके पास शीर्षक है।

वो करें जो आपको खुश करता है ।

इसके बजाय अंदर की ओर मुख करें, मानव की सेवा करें।

लोग केवल भावुक लोगों का अनुसरण करते हैं। अपने जुनून की खोज करें और उसका पीछा करें।

समस्याएं आपको अंततः मजबूत बनाती हैं। इसलिए कोशिश करते रहें।

हमेशा अपने भविष्य-स्वयं के बारे में एक दृष्टि रखें, इसके लिए कड़ी मेहनत करें।

फ्यूचर पर काम करना शुरू करें। अब उन पर प्राथमिकताएं और अधिनियम निर्धारित करें।

जितना संभव हो उतने विक्षेप को कम करने का प्रयास करें। एक समय में एक चीज पर ध्यान दें।

आभारी रहें और छोटी चीजों के लिए मुस्कुराते रहें।

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Do these small things make you smart? ये आदतें आपको स्मार्ट बनाती हैं

ये छोटी-छोटी आदतें आपको स्मार्ट बनाती हैं?

Do these small things make you smart?

ये बाते आपको स्मार्ट ही नहीं बल्कि एक बेहतर इंसान बनने में आपकी मदद करेगी।

सुबह जल्दी उठने की पहल करे: अगर आप ना भी उठ पाए तो अपनी अलार्म घड़ी में जो आप टाइम सेट करते है, उसे थोड़ा सा बदलकर पीछे कर दे।

सही और गलत में फर्क करना सीखे: सही और गलत में फर्क करना सीखे, तभी आप में निर्णाय लेने की क्षमता का विकास होगा।

शेयरिंग करना सीखे: शुरू से ही दूसरों के साथ चीजें शेयर करने की आदत डालें। इससे रिश्तों में मजबूती आती है। और विश्वास बढ़ता है।

दूसरों की मदद करना सीखे: अगर कोई मुसीबत में हो या किसी को आपकी जरूरत हो तो ऐसी स्थिति में आपको दूसरों की मदद करना जरूर सीखे। ना सिर्फ परिचितों की मदद अनजान लोगों की मदद के लिए भी प्ररित करें।

धैर्य रखना सीखे: आजकल के लोगो में धैर्य की कमी देखी जाती हैं, उनको हर चीज जल्दी और अपने हाथ में चाहिए। लेकिन आप इंतजार करना सीखे। आपको पता होना चाहिए की धैर्य और इंतजार से ही काम बनाते हैं।

समय की कद्र करना सीखे: जीवन में आगे बढऩे के लिए कद्र करना जरूर हैं। अपने काम के प्रति निष्ठावान बने।

लापरवाही से काम करने की आदत से बचे।

बड़ों की बात मानना: आपसे बड़े हैं वो हमेशा आपके भले के लिए आपसे कुछ बोल रहे हैं।

प्रार्थना करना सीखे: हर दिन प्रार्थना करने की आदत डालें। इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ता हैं। प्रार्थना करने से पॉजिटीव थिकिंग और एकाग्रता में सुधार बढ़ती है।

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स्मार्ट लोग अपने फ्री टाइम में क्या करते हैं?

जो भी दुनिया के स्मार्ट लोग है वो अपने खाली समय में किताब पढ़ते हुए ही नजर आएंगे।

आप देखिए आपके आसपास जितने भी स्मार्ट लोग है वो किताबे जरूर पढ़ते होंगे इसलिए वो इतने स्मार्ट है।

हम लोग है ना किताबो कि ताकत को बहुत कम में आकते है।

किताबों ने बुक बेचने वाले जैफ बेजोस को करोड़पति बना दिया, किताब लिखने वाली लेखक जे.के. राउलिंग को करोड़पति बना दिया और किताब पढ़ने वाले वॉरेन बफेट को करोड़पति बना दिया।

देखिए जब भी कोई लेखक किताब लिखता है तो उस किताब में वो अपनी जिंदगी की सारी गलतियों को, उसके ज़िंदगी भर के अनुभव और वो अपनी गलतियों से सीख कर कामयाब कैसे बना वो ये सब एक बुक में केद कर देता है जो की बहुत कम पन्नों में कैद हो जाती है।

अब आप सोचिए अगर कोई भी बंदा वो किताब पढ़ लेगा तो वो बंदा उस लेखक कि जिंदगी को एक तरह से जी लेगा । वो उस लेखक के अनुभव को इस्तमाल कर सकता है, उस लेखक ने जो गलतिया की थी वो गलतियां करने से बच सकता है और उसकी कामयाबी से प्रोत्साहित होकर और कामयाबी हासिल कर सकता है।

ये होती है किताबे पढ़ने की ताकत आप लोगो की सालो की ज़िंदगी को एक छोटी से किताब में जी लेंगे। अगर आप ऐसे बहुत से किताब पढ़ लेंगे तो आप ढेर सारी जिंदगियां जी लेंगे।

गैलीलियो का एक वाक्य है “एक किताब पढ़ने वाला व्यक्ति १०० जिंदगियां जीता है”

अब मेरे बोलने का यह मतलब नहीं है कि अगर आप ऐसे किताबे पढ़ लेंगे तो आप गलती करना बंद कर देंगे। नहीं बिल्कुल नहीं । पर आप गलती करे ऐसे मौके घट जाएंगे क्युकी आपको किताबों से ये सीख जरूर मिल जाएंगे कि आपके लिए कोई चीज काम करेंगी या नहीं करेंगी।

इसलिए आप भी स्मार्ट बनिए और किताबे पढ़ना शुरू कीजिए।

नमस्कर उत्तर पढ़ने के लिए धन्यवाद अगर आपको उत्तर पसंद आया हो तो कृपया उत्तर को उपवोट करे इससे मुझे और अच्छे उत्तर लिखने का प्रोत्साहन मिलता है।

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जीवन में कौन सी बातों को कभी नहीं भूलना चाहिए?

नेटफ्लिक्स ने बिल गेट्स के जीवन पर तीन भाग में एक डॉक्यूमेंट्री जारी की है। बिल गेट्स का जीवन कई मामलों में बेमिसाल है।

गेट्स की आदतें…

उनके सोचने-समझने का तरीका…

ऑफिस में प्रयोग किए जाने वाले सॉफ्टवेयर तैयार करने से शरु होने वाली उनकी यात्रा से लेकर दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी की स्थापना और दुनिया के सबसे संपन्न व्यक्ति की उपलब्धि को अर्जित करने के बाद उनका सबसे बड़े परोपकारी फाउंडेशन की अगुवाई करना जैसी बातें उनके जीवन को बेजोड़ बनाती हैं।

लेकिन मुझे लगता है कि बिल गेट्स को सबसे अनूठा बनाने वाली बात यह हैः

इस डॉक्यूमेंट्री के दौरान इंटरव्यूअर ने बिल गेट्स से बहुत सामान्य से प्रश्न पूछे…

“आपका पसंदीदा भोजन क्या है?”

“कौन सा एनिमल आपको सबसे अच्छा लगता है?”

इस जैसे ही कुछ बहुत साधारण प्रश्न गेट्स से पूछे गए।

लेकिन अचानक ही इंटरव्यूअर ने गेट्स से एक असाधारण प्रश्न पूछ लिया.

शायद उस असाधारण प्रश्न को पूछने के पीछे इंटरव्यूअर की मंशा गेट्स को प्रश्नजाल से मुक्त कर एक ईमानदार उत्तर पाने की थी। या शायद उसने ऐसा जताया।

चाहे जो हो, इंटरव्यूअर ने गेट्स से पूछाः

“आपके जीवन का सबसे बुरा दिन कौन सा था?”

गेट्स ने कुछ पल के लिए अपनी आंखें मूंद लीं। फिर नीचे देखा। वे शायद कुछ सोच रहे थे। वे जानते थे कि वे क्या कहना चाहते थे लेकिन शायद वह कहना नहीं चाहते थे। उनकी जगह कोई और होता तो उसे भी यही असमंजस होता।

गेट्स ने उत्तर दियाः “जिस दिन मेरी मां का निधन हो गया।”

बस इतना ही। ये उस व्यक्ति के शब्द थे जिसके सामने दुनिया की सारी उपलब्धियां छोटी पड़ गई थीं… जिसने दुनिया से हर वह चीज प्राप्त कर ली थी जो वह पा सकता था।

और उन्होंने क्या कहा? जिस दिन उनकी मां गुज़र गईं।

उन्होंने यह नहीं कहा कि उनके जीवन का सबसे बुरा दिन वह था जब स्टीव जॉब्स ने उनपर चोरी का आरोप लगाया।

उन्होंने यह नहीं कहा कि उनके जीवन का सबसे बुरा दिन वह था जब किसी ने पूरी दुनिया के सामने उनके ऊपर केक फेंक दिया था।

उन्होंने यह नहीं कहा कि उनके जीवन का सबसे बुरा दिन वह था जब उन्हें बिजनेस के नियमों का उल्लंघन करने के लिए 1.3 बिलियन डॉलर का हर्जाना देना पड़ा।

उन्होंने कहा, “जब मेरी मां गुज़र गईं.”

इस दुनिया में आप कितने ही बड़े व्यक्ति क्यों न बन जाओ, कितनी ही बड़ी ख्वाहिशें और सपने आप क्यों न देख लो… जीवन का मोल अंततः रूपए-पैसे, हैसियत और ताकत से नही आंका जाता।

जीवन उन लोगों से मिलकर बनता है जो हमारा हिस्सा होते हैं, जिनकी कमी को हम महसूस करते हैं। इनमें वे लोग भी शामिल होते हैं जिन्हें हम नापसंद करते हैं, लेकिन जीवन का असल सार लोगों से प्रेम करने में है, उनका प्रेम पाने में है।

उनमें से कुछ लोग हमसे पहले चल बसेंगे। वे फिर लौटकर नहीं आएंगे। कभी नहीं।

हमारे पास इफरात समय नहीं है। जिन्हें हम सबसे अधिक चाहते हैं उनके साथ बिताने के लिए तो यह निहायत ही कम है।

आज बिल गेट्स ने मुझे यह बात याद दिलाई है। हमें यह कभी नहीं भूलनी चाहिए।

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Amitabh Bachchan biography in hindi – अमिताभ बच्चन जीवनी

Amitabh Bachchan: अमिताभ बच्चन हिन्दी फिल्मों के अभिनेता हैं। हिन्दी सिनेमा में चार दशकों से ज्यादा का वक्त बिता चुके अमिताभ बच्चन को उनकी फिल्मों से ‘एंग्री यंग मैन’ की उपाधि प्राप्त है। वे हिन्दी सिनेमा के सबसे बड़े और सबसे प्रभावशाली अभिनेता माने जाते हैं। उन्हें लोग ‘सदी के महानायक’ के तौर पर भी जानते हैं और प्‍यार से बिग बी, शहंशाह भी कहते हैं।

Amitabh Bachchan
Amitabh Bachchan

सदी के इस महानायक ने भी राजनीति में अपनी किस्‍मत आजमायी थी वे राजीव गांधी के करीबी दोस्‍त थे इसलिये उन्‍होंने कांग्रस पार्टी जॉइन की थी और इलाहाबाद से देश आठवें आम चुनाव में ताकतवर नेता एच एन बहुगुणा को हराया था। लेकिन उन्‍हें यह राजनीति का संसार बहुत भाया और उन्‍होंने मात्र तीन साल में इससे अलविदा ले लिया। 

पृष्ठभूमि

Amitabh Bachchan का जन्म उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिले में हुआ था। उनके पिता का नाम हरिवंश राय बच्चन था। उनके पिता हिंदी जगत के मशहूर कवि रहे हैं। उनकी मां का नाम तेजी बच्चन था। उनके एक छोटे भाई भी हैं जिनका नाम अजिताभ है। अमिताभ का नाम पहले इंकलाब रखा गया था लेकिन उनके पिता के साथी रहे कवि सुमित्रानंदन पंत के कहने पर उनका नाम अमिताभ रखा गया।

पढ़ाई – studies

Amitabh Bachchan शेरवुड कॉलेज, नैनीताल के छात्र रहे हैं। इसके बाद की पढ़ाई उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोरीमल कॉलेज से की थी। पढ़ाई में भी वे काफी अव्‍वल थे और कक्षा के अच्‍छे छात्रों में उनकी गिनती होती थी। कहीं ना कहीं ये गुण उनके पिताजी से ही आए थे क्‍योंकि वे भी जानेमाने कवि रहे थे। 

शादी – wedding

अमिताभ बच्चन की शादी जया बच्चन से हुई जिनसे उन्हें दो बच्चे हैं। अभिषेक बच्चन उनके सुपुत्र हैं और श्वेता नंदा उनकी सुपुत्री हैं। रेखा से उनके अफेयर की चर्चा भी खूब हुई और लोगों के गॉसिप का विषय बनी। 

करियर – Career

Amitabh Bachchan की शुरूआत फिल्मों में वॉयस नैरेटर के तौर पर फिल्म ‘भुवन शोम’ से हुई थी लेकिन अभिनेता के तौर पर उनके करियर की शुरूआत फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ से हुई। इसके बाद उन्होंने कई फिल्में कीं लेकिन वे ज्यादा सफल नहीं हो पाईं। फिल्म ‘जंजीर’ उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई। इसके बाद उन्होंने लगातार हिट फिल्मों की झड़ी तो लगाई ही, इसके साथ ही साथ वे हर दर्शक वर्ग में लोकप्रिय हो गए और फिल्म इंडस्ट्री में अपने अभिनय का लोहा भी मनवाया।

प्रसिद्ध फिल्में – Famous movies

सात हिंदुस्तानी, आनंद, जंजीर, अभिमान, सौदागर, चुपके चुपके, दीवार, शोले, कभी कभी, अमर अकबर एंथनी, त्रिशूल, डॉन, मुकद्दर का सिकंदर, मि. नटवरलाल, लावारिस, सिलसिला, कालिया, सत्ते पे सत्ता, नमक हलाल, शक्ति, कुली, शराबी, मर्द, शहंशाह, अग्निपथ, खुदा गवाह, मोहब्बतें, बागबान, ब्लैक, वक्त, सरकार, चीनी कम, भूतनाथ, पा, सत्याग्रह, शमिताभ जैसी शानदार फिल्मों ने ही उन्हें सदी का महानायक बना दिया। 

पुरस्‍कार – Award

सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के तौर पर उन्हें 3 बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिल चुका है। इसके अलावा 14 बार उन्हें फिल्मफेयर अवार्ड भी मिल चुका है। फिल्मों के साथ साथ वे गायक, निर्माता और टीवी प्रजेंटर भी रहे हैं। भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री और पद्मभूषण सम्मान से भी नवाजा है

अमिताभ बच्चन से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें

Amitabh Bachchan ‘सदी के महानायक’ कहे जाते हैं। वे हिन्दी फिल्मों के सबसे बड़े सुपरस्टार माने जाते हैं। 

उन्हें असली पहचान फिल्म ‘जंजीर’ से मिली थी। यह फिल्म अमिताभ से पहले कई बड़े अभिनेताओं को ऑफर हुई थी जिसमें मशहूर अभिनेता राजकुमार भी शामिल थे लेकिन राजकुमार ने इस फिल्म को यह कहकर ठुकरा दिया था कि डायरेक्‍टर के बालों के तेल की खुशबू अच्‍छी नहीं है। 

70 और 80 के दौर में फिल्‍मी सीन्‍स में अमिताभ बच्‍चन का ही आधिपत्‍य था। इस वजह से फ्रेंच डायरेक्‍टर फ़्राँस्वा त्रुफ़ो ने उन्‍हें ‘वन मैन इंडस्‍ट्री’ तक करार दिया था।

अपने करियर के दौरान उन्‍होंने कई पुरस्‍कार जीते हैं जिसमें सर्वश्रेष्‍ठ अभिनेता के तौर पर 3 राष्‍ट्रीय फिल्‍म पुरस्‍कार भी शामिल है। इंटरनेशनल फिल्‍म फेस्टिवल्‍स और कई अवार्ड समारोहों में उन्‍हें कई पुरस्‍कारों से सम्‍मानित किया गया है। वे 14 फिल्‍मफेयर पुरस्‍कार भी जीत चुके हैं। उन्‍हें फिल्‍मफेयर में सबसे ज्‍यादा 39 बार नामांकित किया जा चुका है।  

फिल्‍मों में बोले गए उनके डॉयलाग आज भी लोगों के दिलों में ताजा हैं। उनके सुपरहिट करियर में उनके फिल्‍मस के डॉयलाग्‍स का भी अ‍हम रोल रहा है। 

उन्‍हें भारत सरकार की तरफ से 1984 में पद्मश्री, 2001 में पद्मभूषण और 2015 में पद्मविभूषण जैसे सम्‍मान मिल चुके हैं। 

करियर के शुरूआती दौर में उन्‍हें काफी दिक्‍कतों का सामना करना पड़ा था। उनकी फिल्‍में लगातार फलाप हो रही थीं तब वे वापिस घर लौटने का मन बना चुके थे लेकिन फिल्‍म जंजीर उनके करियर का टर्निंग प्‍वाइंट बन गई और फिल्‍म इंडस्‍ट्री में ‘एंग्री यंग मैन’ का उदय हुआ। 

आज जिस Amitabh Bachchan के आवाज की पूरी दुनिया कायल है, एक समय था जब उनकी आवाज उनके करियर में रोड़ा बन रही थी और उन्‍हें नकार दिया गया था लेकिन बाद में उनकी आवाज ही उनकी ताकत बनी और उनकी आवाज औरों से काफी जुदा और भारी थी, इस वजह से उन्‍हें कई निर्देशकों ने कई फिल्‍मों में अपनी कहानी को नैरेट तक करवाया। कई प्रोग्राम्‍स को उन्‍होंने भी होस्‍ट किया। 

अमिताभ के करियर का बुरा दौर 

उनकी फिल्‍में अच्‍छा बिजनेस कर रही थीं कि अचानक 26 जुलाई 1982 को कुली फिल्‍म की शूटिंग के दौरान उन्‍हें गंभीर चोट लगी गई। दरअसल, फिल्‍म के एक एक्‍शन दृश्‍य में अभिनेता पुनीत इस्‍सर को अमिताभ को मुक्‍का मारना था और उन्‍हें मेज से टकराकर जमीन पर गिरना था। लेकिन जैसे ही वे मेज की तरफ कूदे, मेज का कोना उनके आंतों में लग गया जिसकी वजह से उनका काफी खून बह गया और स्‍थिति इतनी गंभीर हो गई कि ऐसा लगने लगा कि वे मौत के करीब हैं लेकिन लोगों की दुआओं की वजह से वे ठीक हो गए। 

राजनीति में प्रवेश – Enter politics

कुली में लगी चोट के बाद उन्‍हें लगा कि वे अब फिल्‍में नहीं कर पाएंगे और उन्‍होंने अपने पैर राजनीति में बढ़ा दिए। उन्‍होंने 8वें लोकसभा चुनाव में अपने गृह क्षेत्र इलाहाबाद की सीट से उ.प्र. के पूर्व मुख्‍यमंत्री एचएन बहुगुणा को काफी ज्‍यादा वोटों से हराया। 

राजनीति में ज्‍यादा दिन वे नहीं टिक सके और फिर उन्‍होंने फिल्‍मों को ही अपने लिए उचित समझा। 

जब उनकी कंपनी एबीसीएल आर्थिक संकट से जूझ रही थी तब उनके मित्र और राजनी‍तिज्ञ अमर सिंह ने उनकी काफी मदद की थी। बाद में अमिताभ ने भी अमर सिंह की समाजवादी पार्टी को काफी सहयोग किया। उनकी पत्‍नी जया बच्‍चन ने समाजवादी पार्टी को ज्‍वाइन कर लिया और वे राज्‍यसभा की सदस्‍य बन गईं। अमिताभ ने पार्टी के लिए कई विज्ञापन और राजनीतिक अभियान भी किए। 

फिल्‍मेां से एक बार फिर उन्‍होंने वापसी की और फिल्‍म ‘शहंशाह’ हिट हुई। इसके बाद उनके अग्निपथ में निभाए गए अभिनय को भी काफी सराहा गया और इसके लिए उन्‍हें राष्‍ट्रीय फिल्‍म पुरस्‍कार भी मिला लेकिन उस दौरान बाकी कई फिल्‍में कोई खास कमाल नहीं दिखा स‍कीं।

फिल्‍मों में तगड़ी वापसी – Strong return in films

2000 में आई मोहब्‍बतें उनके डूबते करियर को बचाने में काफी मददगार साबित हुई और फिल्‍म को और उनके अभिनय को काफी सराहा गया। इसके बाद उन्‍होंने कई फिल्‍मों में काम किया जिसे आलोचकों के साथ साथ दर्शकों ने भी काफी पसंद किया।

2005 में आई फिल्‍म ‘ब्‍लैक’ में उन्‍होंने शानदार अभिनय किया और उन्‍हें राष्‍ट्रीय फिल्‍म पुरस्‍कार से एक बार फिर सम्‍मानित किया गया। 

फिल्‍म पा में उन्‍होंने अपने बेटे अभिषेक बच्‍चन के ही बेटे का किरदार निभाया। फिल्‍म को काफी पसंद किया गया और एक बार फिर उन्‍हें राष्‍ट्रीय फिल्‍म पुरस्‍कार से नवाजा गया। 

वे काफी लंबे समय से गुजरात पर्यटन के ब्रांड एंबेसडर भी हैं। 

उन्‍होंने टीवी की दुनिया में भी बुलंदियों के झंडे गाड़े हैं और उनके द्वारा होस्‍ट किया गया केबीसी बहुत पापुलर हुआ। इसने टीआरपी के सारे रिकार्ड तोड़ दिए और इस प्रोग्राम के जरिए कई लोग करोड़पति बने।

सामाजिक कार्यों में आगे – Ahead in social work

इन सबके इतर अमिताभ बच्‍चन लोगों की मदद के लिए भी हमेशा आगे खड़े रहते हैं। वे सामाजिक कार्यों में काफी आगे रहते हैं। कर्ज में डूबे आंध्रप्रदेश के 40 किसानों को अमिताभ ने 11 लाख रूपए की मदद की। ऐसे ही विदर्भ के किसानों की भी उन्‍होंने 30 लाख रूपए की मदद की। इसके अलावा और भी कई ऐसे मौके रहे हैं जिसमें अमिताभ ने दरियादिली दिखाई है और लोगों की मदद की है। 

जून 2000 में वे पहले ऐसे एशिया के व्‍यक्ति थे जिनकी लंदन के मैडम तुसाद संग्रहालय में वैक्‍स की मूर्ति स्‍थापित गई थी। 

उनके ऊपर कई किताबें भी लिखी जा चुकी हैं- 

अमिताभ बच्‍चन: द लिजेंड 1999 में, टू बी ऑर नॉट टू बी: अमिताभ बच्‍चन 2004 में, एबी: द लिजेंड (ए फोटोग्राफर्स ट्रिब्‍यूट) 2006 में, अमिताभ बच्‍चन: एक जीवित किंवदंती 2006 में, अमिताभ: द मेकिंग ऑफ ए सुपरस्‍टार 2006 में, लुकिंग फॉर द बिग बी: बॉलीवुड, बच्‍चन एंड मी 2007 में और बच्‍चनालिया 2009 में प्रकाशित हुई हैं। 

वे शुद्ध शाकाहारी हैं और 2012 में ‘पेटा’ इंडिया द्वारा उन्‍हें ‘हॉटेस्‍ट वेजिटेरियन’ करार दिया गया। पेटा एशिया द्वारा कराए गए एक कांटेस्‍ट पोल में एशिया के सेक्सियस्‍ट वेजिटेरियन का टाईटल भी उन्‍होंने जीता। 

टेक्‍नोलॉजी के दौर में भी सबसे एक्टिव बच्‍चन

आज का दौर सोशल मीडिया का है। खबरें पल पल में इंटरनेट पर अपलोड होती रहती हैं। ऐसे में हमारे बिगबी कहां पीछे रहने वाले हैं। वे भी फेसबुक, ट्विटर का जमकर इस्‍तेमाल करते हैं और यही कारण है कि दोनों सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर उनके फैंस की संख्‍या लाखों-करोड़ों में है। वे अपने प्रंशसको को कभी नहीं निराश करते हैं और पल पल की घटनाओं को वे इन माध्‍यमों के जरिए शेयर करते हैं।

जीवन परिचय
वास्तविक नामअमिताभ हरिवंश राय श्रीवास्तव
उपनामबॉलीवुड के मुन्ना, बिग बी, एंग्री यंग मैन, एबी सीनियर, अमित, शहंशाह
व्यवसायअभिनेता
शारीरिक संरचना
लम्बाईसे० मी०- 185
मी०- 1.85
फीट इन्च- 6’ 1”
वजन/भार (लगभग)80 कि० ग्रा०
शारीरिक संरचना (लगभग)-छाती: 42 इंच
-कमर: 34 इंच
-Biceps: 13 इंच
आँखों का रंगकाला
बालों का रंगभूरा
व्यक्तिगत जीवन
जन्मतिथि11 अक्टूबर 1942
आयु (2016 के अनुसार)74 वर्ष
जन्मस्थानइलाहाबाद, संयुक्त प्रांत (उत्तर प्रदेश), ब्रिटिश भारत
राशितुला
राष्ट्रीयताभारतीय
हस्ताक्षर
गृहनगरइलाहाबाद, उत्तर प्रदेश (वर्तमान में मुंबई में रहते हैं)
स्कूल/विद्यालयज्ञान प्रमोधिनी, बॉयज हाई स्कूल, इलाहाबाद, भारत
महाविद्यालय/विश्वविद्यालयशेरवुड कॉलेज, नैनीताल, भारत
किरोरी मल कॉलेज, नई दिल्ली, भारत
शैक्षिक योग्यताविज्ञान में स्नातक

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Amjad Khan Biography in Hindi – अमजद खान जीवनी…

Amjad Khan: अमजद खान का जन्म 1943 में (विभाजन से पूर्व) लाहौर में हुआ था, वह भारतीय फिल्मो में जाने-माने अभिनेता जयंत के पुत्र थे, अभिनेता के रूप में उनकी पहली फिल्म “शोले” थी और यह फिल्म अमजद Amjad Khan को शत्रुघ्न सिन्हा के कारण मिली थी , वास्तव में शोले के गब्बर सिंह की भूमिका पहले शत्रु को ही दी गयी थी परन्तु समयाभाव के कारण इनकार कर दिया तो यह भूमिका अमजद खान को मिल गयी।

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Biography of Amjad Khan in Hindi
Biography of Amjad Khan

अभिनय की दुनिया में आने से पूर्व अमजद , के.आसिफ के साथ सहायक निर्देशक के रूप में काम कर रहे थे। सहायक के रूप में काम करने के साथ ही उन्होंने पहली बार कैमरे का सामना किया और के.आसिफ की फिल्म “लव एंड गॉड” के बाद अमजद खान Amjad Khan ने चेतन आनन्द की फिल्म “हिंदुस्तान की कसम” में एक पाकिस्तानी पायलट की भूमिका की। ये दोनों ही भूमिकाये ऐसी थी जो न दर्शको को याद रही और न स्वयं अमजद खान को। अंतत “शोले” को ही अमजद की पहली फिल्म मानते है।

शोले के अलावा अमजद खान Amjad Khan ने “कुर्बानी” “लव स्टोरी” “चरस” “हम किसी से कम नही ” “इनकार” “परवरिश” “शतरंज के खिलाड़ी” “देस-परदेस” “दादा” “गंगा की सौगंध ” “कसमे-वादे” “मुक्कदर का सिकन्दर” “लावारिस” “हमारे तुम्हारे ” “मिस्टर नटवरलाल” “सुहाग ” “कालिया” “लेडीस टेलर” “नसीब” “रॉकी” “यातना” “सम्राट” “बगावत” “सत्ते पे सत्ता” “जोश” “हिम्मतवाला” आदि सैकंडो फिल्मो में यादगार भूमिकाये की। अमजद खान शराब और अन्य बुरी आद्तो से दूर थे।

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निर्देशन भी किया

अमजद खान ने अपने लंबे करियर में ज्यादातर नकारात्मक भूमिकाएँ निभाईं। अमिताभ बच्चन, धर्मेन्द्र जैसे सितारों के सामने दर्शक उन्हें खलनायक के रूप में देखना पसंद करते थे और वे स्टार विलेन थे। इसके अलावा उन्होंने कुछ फिल्मों में चरित्र और हास्य भूमिकाएँ अभिनीत की, जिनमें शतरंज के खिलाड़ी, दादा, कुरबानी, लव स्टोरी, याराना प्रमुख हैं। निर्देशक के रूप में भी उन्होंने हाथ आजमाए। चोर पुलिस (1983) और अमीर आदमी गरीब आदमी (1985) नामक दो फिल्में उन्होंने बनाईं, लेकिन इनकी असफलता के बाद उन्होंने फिर कभी फिल्म निर्देशित नहीं की।

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पिता को माना गुरु

अमजद अपनी सफलता और अभिनेता के करियर को इतनी ऊँचाई देने का श्रेय पिता जयंत को देते हैं। पिता को गुरु का दर्जा देते हुए उन्होंने कहा था कि रॉयल अकादमी ऑफ ड्रामेटिक आर्ट अपने छात्रों को जितना सिखाती है, उससे ज्यादा उन्होंने अपने पिता से सीखा है। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में यदि उन्होंने प्रवेश लिया होता, तो भी इतनी शिक्षा नहीं मिल पाती। उनके पिता उन्हें आखिरी समय तक अभिनय के मंत्र बताते रहे।

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दरियादिल अमजद

पर्दे पर खलनायकी के तेवर दिखाने वाले अमजद निजी जीवन में बेहद दरियादिल और शांति प्रिय इंसान थे। अमिताभ बच्चन ने एक साक्षात्कार में बताया था कि अमजद बहुत दयालु इंसान थे। हमेशा दूसरों की मदद को तैयार रहते थे। यदि फिल्म निर्माता के पास पैसे की कमी देखते, तो उसकी मदद कर देते या फिर अपना पारिश्रमिक नहीं लेते थे। उन्हें नए-नए चुटकुले बनाकर सुनाने का बेहद शौक था। अमिताभ को वे अक्सर फोन कर लतीफे सुनाया करते थे।

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मृत्यु

एक कार दुर्घटना में अमजद बुरी तरह घायल हो गए। एक फ़िल्म की शूटिंग के सिलसिले में लोकेशन पर जा रहे थे। ऐसे समय में अमिताभ बच्चन ने उनकी बहुत मदद की। अमजद ख़ान तेजी से ठीक होने लगे। लेकिन डॉक्टरों की बताई दवा के सेवन से उनका वजन और मोटापा इतनी तेजी से बढ़ा कि वे चलने-फिरने और अभिनय करने में कठिनाई महसूस करने लगे। वैसे अमजद मोटापे की वजह खुद को मानते थे। उन्होंने एक साक्षात्कार में बताया था कि- “फ़िल्म ‘शोले’ की रिलीज के पहले उन्होंने अल्लाह से कहा था कि यदि फ़िल्म सु‍परहिट होती है तो वे फ़िल्मों में काम करना छोड़ देंगे।” फ़िल्म सुपरहिट हुई, लेकिन अमजद ने अपना वादा नहीं निभाते हुए काम करना जारी रखा। ऊपर वाले ने मोटापे के रूप में उन्हें सजा दे दी। इसके अलावा वे चाय के भी शौकीन थे। एक घंटे में दस कप तक वे पी जाते थे। इससे भी वे बीमारियों का शिकार बने। मोटापे के कारण उनके हाथ से कई फ़िल्में फिसलती गई। 27 जुलाई, 1992 को उन्हें दिल का दौरा पड़ा और दहाड़ता गब्बर हमेशा के लिए सो गया। अमजद ने हिन्दी सिनेमा के खलनायक की इमेज के लिए इतनी लंबी लकीर खींच दी थी कि आज तक उससे बड़ी लकीर कोई नहीं बना पाया है।

डिम्पल कपाड़िया और राखी अभिनीत फ़िल्म ‘रुदाली’ अमजद ख़ान की आखिरी फ़िल्म थी। इस फ़िल्म में उन्होंने एक मरने की हालात में पहुंचे एक ठाकुर की भूमिका निभाई थी, जिसकी जान निकलते-निकलते नहीं निकलती। ठाकुर यह जानता है कि उसकी मौत पर उसके परिवार के लोग नहीं रोएंगे। इसलिए वह मातम मनाने और रोने के लिए रुपये लेकर रोने वाली रुदाली को बुलाता है।

जीवन परिचय
वास्तविक नामअमजद जकारिया खान
व्यवसायअभिनेता और निर्देशक
प्रसिद्ध भूमिकागब्बर सिंह (फिल्म- शोले)
शारीरिक संरचना
लम्बाईसे० मी०- 178
मी०- 1.78
फीट इन्च- 5’ 10”
वजन/भार (लगभग)120 कि० ग्रा०
आँखों का रंगभूरा
बालों का रंगकाला
व्यक्तिगत जीवन
जन्मतिथि12 नवंबर 1940
जन्मस्थानपेशावर, ब्रिटिश भारत (अब पाकिस्तान)
मृत्यु तिथि27 जुलाई 1992
मृत्यु स्थानमुंबई, भारत
आयु (मृत्यु के समय)51 वर्ष
मृत्यु कारणदिल का दौरा (एक गंभीर सड़क दुर्घटना के बाद)
राशिवृश्चिक
राष्ट्रीयताभारतीय
गृहनगरमुंबई, भारत
स्कूल/विद्यालयसेंट एंड्रयूज हाई स्कूल, बांद्रा, बॉम्बे (अब मुंबई)
महाविद्यालय/विश्वविद्यालयआर.डी नेशनल महाविद्यालय, मुम्बई
शैक्षिक योग्यतादर्शनशास्त्र में स्नातकोत्तर

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