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insaan ki itanee aukaat nahin ki vo kisee bhee insaan ko khareed sake

insaan ki itanee aukaat nahin ki vo kisee bhee insaan ko khareed sake in Hindi

इमाम अली रज़ि अल्लाहु ताअला अन्हु के ख़िदमत में एक शख्स आया और दस्तेअदब को जोड़कर अर्ज़ करने लगा, या अली मेरा एक गुलाम है जो आधा काम सही करता है और आधा काम गलत, समझा समझा कर थक गया हूं वह समझता नहीं आखिर उसे क्या सजा दूं जो मेरी बात समझ जाए,

बस यह कहना था तो इमाम अली रज़ि अल्लाहु ताअला अन्हु ने नज़रों को उठाया, और उस शख्स को देखकर कहा ऐ शख्स किसने कहा कि वह शख्स तुम्हारा गुलाम है, उसने कहा या अली मैंने 200 दीनार में खरीदा है, इमाम अली रज़ि अल्लाहु ताअला अन्हु ने फ़रमाया,

“इंसान की इतनी औकात नहीं कि वो किसी भी इंसान को खरीद सके” ऐ शख्स तुमने अपना गुलाम नहीं बल्कि एक बंदे को 200 दिनार में, इसलिए दिए हैं ताकि वह तुम्हारी मदद कर सके, तुम्हारे काम को आसान बना सके, लेकिन अफसोस है, तुम अपनी ही मददगार को, गुलाम कह रहे हो,

ऐ शख्स बताओ अगर यह मददगार जिसको तुम अपनी जुबान में गुलाम कहते हो, नौकर कहते हो, अगर ना होते, तो तुम अपने काम खुद करतेे, हर छोटे से छोटे काम को बड़ी मुश्किल से करते,

जिस तरह से तुम्हारी आंखें तुम्हें दिखाती है, तुम्हारे कान तुम्हें सुनाते हैं,
तुम अपने हाथों से चीजें पकड़ते हो,
अपने कदमों से जमीन पर चलती हो,
इनका ख्याल रखते हो,
इनको अपना समझते हो,
जब तुम्हारी आंखें थक जाती है, तो इन्हें आराम देते हो,
जब जिस्म थक जाता है तो इसे सुला देते हो,
वैसे ही तुम पर यह फर्ज है, जो मददगार तुमने बाजार से खरीदा,
जो इंसान तुमने अपने काम के लिए रखा,
उसकी भी थकावट और सुकून के बारे में, अल्लाह से डरो,
मैंने अल्लाह के रसूल ﷺसे सुना, के जो इंसान अपने गुलामों पर रहम नहीं करता, उस इंसान की इबादत क्यामत के दिन अल्लाह उसके मुंह पर मारेगा.

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