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Sabaq Amoz kahani|aulad ki tabiyat in hindi

Sabaq Amoz kahani|aulad ki tabiyat in hindi

एक शहर में एक सर्कस था जिस को चलाने वाला शेर पाला करता था और वह शेर तमाशा करते थे, लोग तालियां बजाते थे वह शेरों से प्यार करते थे, उसे खिलाता था पिलाता था यहां तक कि वह शेर बड़े होने लगे वक्त गुजरता रहा हालात बदले.

हुकूमत ने सर्कस पर पाबंदी लगा दी शहर में कोई सर्कस नहीं होगा.

तो बस लोग चले गए सर्कस देखने के लिए कोई नहीं आता, नहीं उन्हें खिलाने के लिए कोई पैसा देता, काफी दिन गुजरे व सर्कस चलाने वाला शेर को अपने पैसे से खिलाता रहा, बिला आखिर उसके सारे पैसे खत्म होने लगे,

उसने सोचा शेर सर्कस तो करते नहीं, और मेरे पास जितने पैसे थे वह खत्म हो गए, मैं इन्को खिलाऊंगा कैसे, किसी ने कहा इन को जंगल में छोड़ आओ यह शेर है शिकार करेंगे और अपना पेट पाल लेंगे.

तुम गरीब इंसान कब तक इनको खिलाओ के उसने कहा हां सही कहा वो शेरों को लेकर जंगल जाता है और तमाम शेर को आजाद कर देता है शेर खुशी खुशी जंगल में चले जाते हैं.

वह बंदा वापस आ जाता है कुछ दिन गुजरे उस शहर में यह खबर फैलने लगे के शेरों को शिकारी कुत्तों ने खा लिया.

उस शेरों के लाशों को देखने के लिए तमाम लोग जमा होने लगे मजाक उड़ाने लगे के शेर को शिकारी कुत्तों ने खा लिया.

इतनी देर में वह सर्कस वाला आया और रो कर कहने लगा अगर मैं अपने शेरों को शिकार करना सिखाता जंगल में रहना सिखाता तो आज यह शेर नहीं मरते.

हम वालीदैन (Parents) भी ऐसा ही करते हैं, अपने बच्चों का ख्याल रखते हैं, प्यार करते हैं, यहां तक कि उसकी हर ख्वाहिश पूरी करते हैं, लेकिन हमारी औलाद जब बड़े होकर दुनिया में जाता है, वह दुनियादारी से ना वाकिफ होता है, और कदम कदम पर नाकामी और तकलीफ का सामना करना पड़ता है.

सबक अमोज कहानी औलाद की तरबियत

इमाम अली रज़ि अल्लाहु ताअला अन्हु ने फ़रमाया अपनी औलाद को प्यार के साथ साथ दुनिया का तल्ख रूप भी दिखाते रहो.
ताके बड़े होकर वह जिंदगी के हर इम्तिहान में कामयाब हो सके.
याद रखना ताकत का होना कमाल नहीं,बल्कि ताकत का सही इस्तेमाल कमाल है.

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